लालकिले से (भाग-६)
टोपी की नहीं टोपी पहनाने की राजनीति
टोपी
नहीं लगाने वाले प्रधानमंत्रियों ने देश को ज्यादा टोपी पहनाई है,
कांग्रेस के टोपी नहीं पहनने वाले नेताओं ने ६ साल में ७ प्रधानमंत्रियों
की कुर्सी छीनकर देश पर चुनाव थोपे हैं। आजादी के बाद देश में कार्यवाहक
प्रधानमंत्री सहित कुल १४ व्यक्ति देश की कुर्सी पर बैठे हैं। इनमें से ७
टोपी लगाने वाले, १ पगड़ी पहनने वाला और ६ टोपी नहीं पहनने वाले थे या हैं।
मनमोहनसिंह की आस्था को देखते हुए मैं उनके बारे में मैं कोई टिप्पणी
नहीं करना चाहूंगा। अब कांग्रेस के निशाने पर अरविंद केजरीवाल हैं। अब
उन्होंने उसे समर्थन की टोपी पहनाई है। श्रृंखला लालकिले से के भाग ६ में
प्रस्तुत है जनता को टोपी पहनाने की राजनीति, टोपी के समाजशास्त्र और
राजनीति शास्त्र के साथ।
१. भारत के प्रधानमंत्रियों में पं. नेहरू, गुलजारीलाल नंदा, लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, चौधरी चरणंिसंह, वीपी सिंह टोपी लगाते थे। सरदार मनमोहनसिंह पगड़ी पहनते हैं। ये इन लोगों की वेशवूषा का अभिन्न हिस्सा था या है।
२. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, पीबी नरसिंहाराव, एचडी देवेगौडा, इंदकुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी ने वेशवूषा के तौर पर कभी टोपी नहीं पहनी। कांग्रेसी नेताओं ने किसी खास मौके पर गांधी टोपी लगाई तो वाजपेयी संघ के कार्यक्रमों में काली टोपी पहने नजर आए।
३. २०१४ के चुनाव में प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में से एक भाजपा के नरेन्द्र मोदी भी टोपी नहीं पहनते। संघ के कायक्रमों में वे अवश्य काली टोपी में नजर आते हैं। इसके अलावा उन्हें पगड़ी में फोटो खिंचाने का शौक है। उनके पगड़ी में जितने प्रकार के फोटो हैं उतने शायद ही किसी दूसरे राजनेता के हों। एक बार तो वे हैट में भी नजर आए थे। अन्ना आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल भी टोपी लगाने लगे हैं। कांग्रेस के दावेदार राहुल गांधी भी कांग्रेस के खास कार्यक्रमों में ही गांधी टोपी में नजर आते हैं।
अन्ना आंदोलन के बाद गांधी टोपी (वास्तव में यह कुमाउंनी या खानदेशी टोपी है ) राजनीति के केन्द्र में है। हर किसी में टोपी लगाने की होड़ मची हुई। पर लोग यह बात भूल चुके हैं टोपी, पगड़ी या सांफा हिन्दुस्तानी समाज में सदैव से ही सम्मान का प्रतीक रही है। इसलिए यह कहावत भी बनी कि उसकी टोपी या पगडी़ मत उछालो। आजादी के आंदोलन और आजादी के बाद ८० के दशक तक टोपी वाले नेताओं ने देश को संभाला। उसके बाद दौर आरंभ हुआ बगैर टोपी वाले नेताओं का, वीपी सिंह के अपवाद को छोडक़र। इन्होंने देश को टोपी पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वाजपेयी अपवाद हो सकते हैं। देश को आजाद हुए ६६ साल हो चुके हैं। इसमें कांग्रेस ने ५३ साल और गैर कांग्रेसी दलों में १३ साल राज किया। इन १३ में से भी ६ साल भाजपा के अटलबिहारी वाजपेयी ने राज किया। बाकी के ६ सालों में कांग्रेस ने मोराराजी देसाई (१९७९), चौधरी चरणसिंह(१९८०), वीपी ंिसहं(१९९०), चंद्रशेखर (१९९१), अटलबिहारी वाजपेयी(१९९६), एचडी देवेगौड़ा (१९९७)और इंद्रकुमार गुजराल (१९९८)की सरकार गिराईं। यानी ६ साल में ७ सरकार गिराईं। इनमें से चार प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह , चंद्रशेखर, देवेगौड़ा और गुजरात सीधे-सीधे कांग्रेस के समर्थन की बैशाखी पर चल रहे थे। मोरारजी, वीपी ंिसंह और अटलबिहारी वाजपेयी को गिराने का खेल कांग्रेस ने ही रचा था। वीपी सिंह सरकार को गिराने में भाजपा भी जिम्मेदार थी
यानी सत्ता पाने के लिए कांग्रेस ने सदैव जनता को टोपी पहनाई है। कभी भी किसी गैर कांग्रेसी सरकार को कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया। वाजपेयी को छोडक़र कोई भी गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। कार्यकाल को छोड़ो पूरे ३६५ दिन भी गद्दी पर नहीं बैठ पाया। कांग्रेस का समर्थन चरणसिंह को १७० दिन,चंद्रशेखर को २२३ देवेगौड़ा को ३२४ और गुजराल को ३३२ दिन रहा। गैर भाजपा सरकारों में कांग्रेस ने मोरारजी देसाई की सरकार को २ साल १२६ दिन, वीपी सिंह को ३४३ दिन और पहली बार की वाजपेयी सरकार को १६ दिनों में गिरा दिया। कांग्रेस ने गैर कांग्रेसी सरकारों में कोई न कोई चरणसिंह, चंद्रशेखर या देवेगौड़ा हमेशा की खाजे रखा ताकि समय आने पर काम आ सके।
अब कांग्रेस ने समर्थन के नाम पर अरविंद केजरीवाल को टोपी पहनाई है। पुराने डेटा के आधार पर केजरीवाल मान सकते हैं कि उन्हें कम से कम ३४३ दिन का समर्थन तो मिल ही सकता है। इस समर्थन की कीमत वह लोकसभा चुनाव में फिर किसी को चरणसिंह या चंद्रशेखर बनवाने की शर्त पर ले सकती है। यानी २०१४ के बाद एक और मध्यावधि चुनाव की तैयारी। अब ऐसा होता है या नहीं यह तो देश की जनता ही तय करेगी।
१. भारत के प्रधानमंत्रियों में पं. नेहरू, गुलजारीलाल नंदा, लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, चौधरी चरणंिसंह, वीपी सिंह टोपी लगाते थे। सरदार मनमोहनसिंह पगड़ी पहनते हैं। ये इन लोगों की वेशवूषा का अभिन्न हिस्सा था या है।
२. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, पीबी नरसिंहाराव, एचडी देवेगौडा, इंदकुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी ने वेशवूषा के तौर पर कभी टोपी नहीं पहनी। कांग्रेसी नेताओं ने किसी खास मौके पर गांधी टोपी लगाई तो वाजपेयी संघ के कार्यक्रमों में काली टोपी पहने नजर आए।
३. २०१४ के चुनाव में प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में से एक भाजपा के नरेन्द्र मोदी भी टोपी नहीं पहनते। संघ के कायक्रमों में वे अवश्य काली टोपी में नजर आते हैं। इसके अलावा उन्हें पगड़ी में फोटो खिंचाने का शौक है। उनके पगड़ी में जितने प्रकार के फोटो हैं उतने शायद ही किसी दूसरे राजनेता के हों। एक बार तो वे हैट में भी नजर आए थे। अन्ना आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल भी टोपी लगाने लगे हैं। कांग्रेस के दावेदार राहुल गांधी भी कांग्रेस के खास कार्यक्रमों में ही गांधी टोपी में नजर आते हैं।
अन्ना आंदोलन के बाद गांधी टोपी (वास्तव में यह कुमाउंनी या खानदेशी टोपी है ) राजनीति के केन्द्र में है। हर किसी में टोपी लगाने की होड़ मची हुई। पर लोग यह बात भूल चुके हैं टोपी, पगड़ी या सांफा हिन्दुस्तानी समाज में सदैव से ही सम्मान का प्रतीक रही है। इसलिए यह कहावत भी बनी कि उसकी टोपी या पगडी़ मत उछालो। आजादी के आंदोलन और आजादी के बाद ८० के दशक तक टोपी वाले नेताओं ने देश को संभाला। उसके बाद दौर आरंभ हुआ बगैर टोपी वाले नेताओं का, वीपी सिंह के अपवाद को छोडक़र। इन्होंने देश को टोपी पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वाजपेयी अपवाद हो सकते हैं। देश को आजाद हुए ६६ साल हो चुके हैं। इसमें कांग्रेस ने ५३ साल और गैर कांग्रेसी दलों में १३ साल राज किया। इन १३ में से भी ६ साल भाजपा के अटलबिहारी वाजपेयी ने राज किया। बाकी के ६ सालों में कांग्रेस ने मोराराजी देसाई (१९७९), चौधरी चरणसिंह(१९८०), वीपी ंिसहं(१९९०), चंद्रशेखर (१९९१), अटलबिहारी वाजपेयी(१९९६), एचडी देवेगौड़ा (१९९७)और इंद्रकुमार गुजराल (१९९८)की सरकार गिराईं। यानी ६ साल में ७ सरकार गिराईं। इनमें से चार प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह , चंद्रशेखर, देवेगौड़ा और गुजरात सीधे-सीधे कांग्रेस के समर्थन की बैशाखी पर चल रहे थे। मोरारजी, वीपी ंिसंह और अटलबिहारी वाजपेयी को गिराने का खेल कांग्रेस ने ही रचा था। वीपी सिंह सरकार को गिराने में भाजपा भी जिम्मेदार थी
यानी सत्ता पाने के लिए कांग्रेस ने सदैव जनता को टोपी पहनाई है। कभी भी किसी गैर कांग्रेसी सरकार को कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया। वाजपेयी को छोडक़र कोई भी गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। कार्यकाल को छोड़ो पूरे ३६५ दिन भी गद्दी पर नहीं बैठ पाया। कांग्रेस का समर्थन चरणसिंह को १७० दिन,चंद्रशेखर को २२३ देवेगौड़ा को ३२४ और गुजराल को ३३२ दिन रहा। गैर भाजपा सरकारों में कांग्रेस ने मोरारजी देसाई की सरकार को २ साल १२६ दिन, वीपी सिंह को ३४३ दिन और पहली बार की वाजपेयी सरकार को १६ दिनों में गिरा दिया। कांग्रेस ने गैर कांग्रेसी सरकारों में कोई न कोई चरणसिंह, चंद्रशेखर या देवेगौड़ा हमेशा की खाजे रखा ताकि समय आने पर काम आ सके।
अब कांग्रेस ने समर्थन के नाम पर अरविंद केजरीवाल को टोपी पहनाई है। पुराने डेटा के आधार पर केजरीवाल मान सकते हैं कि उन्हें कम से कम ३४३ दिन का समर्थन तो मिल ही सकता है। इस समर्थन की कीमत वह लोकसभा चुनाव में फिर किसी को चरणसिंह या चंद्रशेखर बनवाने की शर्त पर ले सकती है। यानी २०१४ के बाद एक और मध्यावधि चुनाव की तैयारी। अब ऐसा होता है या नहीं यह तो देश की जनता ही तय करेगी।
भारतीय समाज और आजादी के आंदोलन में टोपी
भारतीय
समाज के साथ राजनीति में भी टोपी, पगड़ी और सांफे का प्रमुख स्थान रहा है।
आजादी के आंदोलन में सारे आंदोलनकारी टोपी, पगड़ी या सांफा पहनते थे।
सिर्फ भगतसिंह हैट लगाते थे। कांग्रेस की तो पहचान थी यह टोपी। यहां तक कि
कांग्रेस के क्रांतिकारी नेता सुभाषचन्द्र बोस तक टोपी लगाते थे। यहां तक
कि आजादी के आंदोलन से जुड़े सबसे आधुनिक नेता पं. जवाहरलाल नेहरू भी टोपी
लगाते और अपने नाम के आगे पं. लगाते। तिलक की पगड़ी, मौलाना कलाम की टोपी
सभी को याद होगी।











